January 21, 2026

यूसीसी का एक साल: उत्तराखंड में विवाह पंजीकरण की बदली तस्वीर, डिजिटल सुगमता से टूटे रिकॉर्ड

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Uttarakhand Uniform Civil Code ucc

देहरादून: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) के लागू होने का एक वर्ष आगामी 27 जनवरी को पूरा होने जा रहा है। महिला सशक्तिकरण और नागरिक अधिकारों में समानता लाने के साथ-साथ, UCC ने सरकारी प्रक्रियाओं के ‘सरलीकरण’ का एक नया मानक स्थापित किया है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण विवाह पंजीकरण के आंकड़ों में देखने को मिला है।

डिजिटल क्रांति: अब दफ्तरों के चक्करों से मिली मुक्ति

UCC लागू होने से पहले ‘उत्तराखंड विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 2010’ के तहत पंजीकरण प्रक्रिया पूरी तरह ऑफलाइन थी। पति-पत्नी को गवाहों के साथ अनिवार्य रूप से सब-रजिस्ट्रार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे।

अब क्या बदला है?

100% ऑनलाइन प्रक्रिया: अब दंपत्ति और गवाह कहीं से भी अपने दस्तावेज अपलोड कर और वीडियो बयान दर्ज कर आवेदन कर सकते हैं।
तेज़ डिलीवरी: कानूनन 15 दिन की समय सीमा तय है, लेकिन औसतन मात्र 5 दिनों में प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं।
पारदर्शिता: पूरी प्रक्रिया मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त और पारदर्शी बनाई गई है।

आंकड़ों की जुबानी: UCC की सफलता

पिछले एक साल (19 जनवरी 2026 तक) के आंकड़े दर्शाते हैं कि जनता ने इस व्यवस्था को हाथों-हाथ लिया है:
अन्य महत्वपूर्ण पंजीकरण:
* विवाह विच्छेद (ऑनलाइन): 316
* लिव-इन रिलेशनशिप (प्रवेश): 68
* लिव-इन रिलेशनशिप (समाप्ति): 02

मॉडल कानून की ओर बढ़ते कदम
UCC न केवल कानूनी समानता सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि यह तकनीक के माध्यम से सुशासन (E-Governance) का भी उत्कृष्ट उदाहरण बन गया है। जहाँ पुराने कानून में पंजीकरण की दर बेहद कम थी, वहीं अब प्रतिदिन औसतन 1400 पंजीकरण होना सिस्टम पर जनता के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।

“उत्तराखंड ने समान नागरिक संहिता लागू करते हुए देश को नई दिशा दिखाई है। बीते एक साल में जिस पारदर्शिता और सरलता से प्रावधानों को लागू किया गया, उससे नागरिकों का विश्वास बढ़ा है। उत्तराखंड का UCC हर मायने में एक मॉडल कानून साबित हुआ है।”

पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड

मुख्य बदलाव जो प्रभावी रहे:

  • भौतिक उपस्थिति की अनिवार्यता खत्म: अब बायोमेट्रिक और वीडियो वेरिफिकेशन ने लंबी कतारों को खत्म कर दिया है।
  • समयबद्ध सेवा: ‘सेवा के अधिकार’ की तर्ज पर तय समय सीमा के भीतर प्रमाणपत्र की प्राप्ति।
  • व्यापक कवरेज: बाल अधिकारों और महिला सुरक्षा को केंद्र में रखकर प्रक्रियाओं को डिजाइन किया गया।

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