हरीश रावत का बड़ा बयान- ‘मुझे सामूहिक नेतृत्व से हटाने की कृपा करें’ मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में दिया इनके नाम का सुझाव

देहरादून: पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव हरीश रावत ने पार्टी प्रदेश में चुनावी रण से पहले मुख्यमंत्री पद के दावेदार की घोषणा करने की अपील की थी। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डा इंदिरा हृदयेश ने हरीश रावत के इस सुझाव को खारिज कर उन्हें पार्टी की परंपरा याद दिला दी। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि आगामी चुनाव को लेकर पार्टी का रुख स्पष्ट कर चुके हैं। इस पर देर शाम हरीश रावत ने भी प्रतिक्रिया दी कि पार्टी में चुनाव से पहले नेता तय करने की परंपरा बदली गई है। उसके अधिकतर अच्छे नतीजे भी रहे।

वहीँ अब पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि, “प्रीतम सिंह सेनापति हैं, यह बहुत स्तुत्य कथन है, उन्हें पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किये जाने का अनुरोध है, मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में इंदिरा हृदयेश जी का भी स्वागत करूँगा, मैंने अपने नाम को लेकर जो असमंजस है उसको समाप्त किया है। देवेंद्र जी ने जो आदर दिया है, मैं उसके लिये उनको बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं, लेकिन मुझे सामूहिक नेतृत्व की पंक्ति से हटा देने की कृपा करें, कुछ समय व्यक्ति को उन्मुक्त भी रहना चाहिये।“

आगे उन्होंने लिखा कि, “मैं उसी दिशा में बढ़ते हुये राजनीति के बल पर धन कमाकर अब प्रदेश की राजनीति पर कब्जा जमाने की प्रवृत्ति के विरूद्ध जन जागृति जगाने का काम करना चाहता हूँ। मेरे लिये निरंतर यह देखना भी कष्टकारक है कि कांग्रेस संगठन एक होटल की चार दिवारी में कैद होकर न रह जाय। मुझे कार्यकर्ताओं और स्वराज आश्रम की गरिमा को भी पुनः स्थापित करना है, फिर कभी-कभी कुछ नाम बोझ हो जाते हैं, 2017 में कुछ ऐसी स्याही से मेरा नाम लिखा गया जो कांग्रेस के ऊपर बोझ बन गया। मैं, कांग्रेस को पापार्जित धन की स्याही से लिखे गये नाम के बोझ से भी मुक्त कर देना चाहता हूँ, संयुक्त नेतृत्व में भी ऐसे नाम का बोझ पार्टी पर बना रहेगा।“

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