सराहनीय: कोरोना काल में 163 आदिवासी गांवों के लिए ‘देवदूत’ बने युवा

मयंक ध्यानी

महाराष्ट्र: कोरोना संकट के दौरान मीडिया की भूमिका काफी अहम रही है. संक्रमण से जुड़ी हर जानकारी और इससे बचाव के संदेश जन-जन तक पहुंचाने के लिए इसका खास योगदान रहा है. लेकिन देश के दुर्गम इलाकों में रहने वाले कई लोग इस जागरुकता से अनछुए ही रहे गये, जिसका सबसे बड़ा कारण स्थानीय भाषा रहा.
महाराष्ट्र राज्य के धड़गांव विकासखंड के भीतर आने वाले 163 गांवों की कहानी कुछ ऐसी ही है. दरअसल, नंदुरबार एक आदिवासी बहुल जिला है, नंदुरबार जिले का ये विकासखंड देश के 100 अती पिछड़े विकासखंड में से एक है. जहां कई गांव अब भी मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर हैं. जिसको देखते हुए यहां के कुछ आदिवासी युवकों ने अपने गांव में जन जागरुकता लाने के लिए नई पहल की है.
कैमरा फोन और कुछ एडिटिंग एप्स की मदद से ये युवक न्यूज, शॉर्ट फिल्म और वीडियोज बनाकर अपनी आदिवासी भाषाओं (पावरी, भीलोरी, आहयरनी आदि) में लोगों को जागरूक कर रहे हैं. जिसके लिए ये युवक इन वीडियोज़ को अलग अलग गांवों के सभाओं में प्रजेक्टर के माध्यम से दिखाते हैं.
कोरोना संक्रमण के दौरान इन युवकों की भूमिका ने वह कर दिखाया है, जिसे सरकार तमाम संसाधन होने के बावजूद भी नहीं कर पाई. युवाओं द्वारा यूट्यूब और सोशल मीडिया के जरिए संक्रमण से सावधान और सुरक्षित रहने के लिए तमाम जरूरी जानकारियां दि जा रही हैं.
इस बारे में टीम के सदस्य निखिल वसावे बताते हैं “कोरोना से पहले हम कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा अन्य मुद्दों पर वीडियोज़ बनाकर प्रजेक्टर के सहारे लोगों को दिखते थे, लेकिन अब लॉकडाउन में हमारी टीम यूट्यूब और सोशल मीडिया के सहारे अपने वीडियो लोगों तक पहुंचा रही है“
आदिवासी जनजागृति कोरोना को लेकर अब तक 60 से अधिक वीडियो बना चुकी है. जिसमें उन्होंने फेक न्यूज के खंडन तथा घर में सुरक्षित रहने पर वीडियो बनाई है.
इस काम को लेकर बात करते हुए टीम के सदस्य दीपक पावरा ने बताया कि “इस काम की शुरुआत वर्ष 2017 में नितेश भारद्वाज ने एक फेलोशिप के दौरान की थी. जिसके बाद से अब तक हमारे टीम में 50 से अधिक लोग शामिल हो चुके हैं. कोरोना के हमारे वीडियोज को जिला स्वास्थ्य विभाग तथा जिला प्रशासन भी इस्तेमाल करता है. हम हमारे वीडियो में जागरुकता लाने के साथ-साथ कई सामाजिक मुद्दों को भी उजागर करते हैं”।
आदिवासी जनजागृति भले ही बहुत छोटे स्तर पर कार्य कर रही है. लेकिन बावजूद इसके ये जन पत्रकारिता की एक बहुत बड़ी मिसाल पेश कर रही है.

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