26 जनवरी को झंडा फहराने और 15 अगस्त को ध्वजारोहण में हैं ये अंतर, जानें..

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गणतंत्र दिवस-2021 (Republic Day-2021)

आज देश 72वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। आज ही के दिन 1950 में भारत का संविधान लागू हुआ था। जब देश को सन् 1950 में 26 जनवरी को संविधान मिला, इसके बाद ही भारत एक लोकतांत्रिक और गणतंत्र देश घोषित हुआ। इस दिन भारत के प्रथम राष्‍ट्रपति डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद ने 21 तोपों की सलामी के बाद देश को उसका संविधान सौंपा था। तब से हर साल ये दिन लोगों के लिए बेहद गौरवमयी होता है जिसे देशवासी हर्षोल्लास से मनाया जाता है।

गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) को झंडा फहराने और स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) पर ध्वजारोहण में जानिये अंतर:

15 अगस्त के दिन देश को आजादी मिली थी। इसी दिन ब्रिटिश झंडे को उतारकर भारतीय ध्वज को ऊपर चढ़ाया गया और फहराया गया था। झंडे को नीचे से ऊपर ले जाकर फहराने की इस प्रक्रिया को ध्वजारोहण (Flag Hoisting) कहते हैं। इसलिए 15 अगस्त को ध्वजारोहण किया जाता है। यानि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर झंडे को नीचे से रस्सी द्वारा खींचकर ऊपर ले जाया जाता है, फिर खोलकर फहराया जाता है।

वहीं 26 जनवरी को हमारा संविधान लागू हुआ था। इसलिए उस दिन पहले से ऊपर बंधे झंडे को केवल फहराया (Flag Unfurling) जाता है। यानि गणतंत्र दिवस के अवसर पर झंडा ऊपर ही बंधा रहता है, जिसे खोलकर फहराया जाता है।

प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति

15 अगस्त के दिन प्रधानमंत्री जो कि केंद्र सरकार के प्रमुख होते हैं, वे ध्वजारोहण करते हैं क्योंकि स्वतंत्रता के दिन भारत का संविधान लागू नहीं हुआ था और राष्ट्रपति जो कि राष्ट्र के संवैधानिक प्रमुख होते हैं, उन्होंने पदभार ग्रहण नहीं किया था। इस दिन शाम को राष्ट्रपति अपना संदेश राष्ट्र के नाम देते हैं। जबकि 26 जनवरी जो कि देश में संविधान लागू होने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, इस दिन संवैधानिक प्रमुख राष्ट्रपति झंडा फहराते हैं। यानि 15 अगस्त के दिन प्रधानमंत्री ध्वजारोहण करते हैं। 26 जनवरी को राष्ट्रपति झंडा फहराते हैं। वहीं संबंधित राज्यों के राज्यपाल राज्य की राजधानियों में गणतंत्र दिवस समारोह के मौक़े पर राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं।

लाल किला व राजपथ

स्वतंत्रता दिवस के दिन लालकिले से ध्वजारोहण किया जाता है। जबकि गणतंत्र दिवस के दिन राजपथ पर झंडा फहराया जाता है।

15 अगस्त 1947 को जब देश आजाद हुआ, भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने दिल्ली के लाल किला स्थिति लाहौरी गेट के ऊपर से ही भारतीय ध्वज फहराया था। वहीं 26 जनवरी 1950 को आजाद भारत का संविधान लागू होने पर पहले गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन राजपथ पर किया गया था। बाद के कुछ वर्ष में गणतंत्र दिवस का आयोजन कुछ अलग जगहों पर भी किया गया था।

प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति का संबोधन

15 अगस्त पर प्रधानमंत्री लाल किले से देश को संबोधित करते हैं, जबकि इसकी पूर्व संध्या पर मतलब 14 अगस्त की शाम को राष्ट्रपति राष्ट्र को संबोधित करते हैं। गणतंत्र दिवस के मौके पर किसी का संबोधन नहीं होता है।

मुख्य अतिथि

26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस के दिन समारोह में मुख्य अतिथि आते हैं। जबकि स्वतंत्रता दिवस पर ऐसा नहीं होता है। इस बार (2021) की परेड में कोई मुख्य अतिथि नहीं है। पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को बुलाया गया था लेकिन यूके कोरोनावायरस का नया स्ट्रेन मिलने के बाद यह यात्रा रद्द कर दी गई। बता दें कि पिछले साल (2020) गणतंत्र दिवस पर ब्राज़ील के राष्ट्रपति जेयर बोलसनारो को बुलाया गया था।

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