बाबरी मस्जिद विध्वंस केस: 28 साल बाद फैसला; आडवाणी, जोशी, उमा सहित सभी आरोपी बरी

Babri Masjid

नई दिल्ली: 28 साल बाद बाबरी (Babri Masjid) विध्वंस केस में सीबीआई की विशेष अदालत ने आज यानी बुधवार को अपना बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाया। कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाये हुए आडवाणी, जोशी समेत सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया। 28 वर्ष तक चली सुनवाई के बाद ढांचा विध्वंस के आपराधिक मामले में फैसला सुनाने के लिए सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एसके यादव ने सभी आरोपियों को आज तलब किया था। फैसला सुनाते वक्त सीबीआई की विशेष अदालत के जज ने कहा कि बाबरी विध्वंस की घटना कोई पूर्व नियोजित नहीं थी। मस्जिद को ढाए जाने की घटना आकस्मिक थी।

क्या थी घटना?

06 दिसंबर 1992 को सोलहवीं सदी की बनी बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) को कारसेवकों की एक भीड़ ने ढहा दिया, जिसे लेकर देश भर में सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया। हिंसा हुई और हज़ारों लोग इस हिंसा की बलि चढ़ गए। अयोध्या में डटे कारसेवकों ने विवादित ढांचे को गिराने के बाद वहां एक अस्थाई मंदिर बना दिया। उसी दिन इस मामले में दो एफ़आईआर दर्ज की गई।

किन पर थे क्या आरोप?

एफआईआर में डकैती, लूट-पाट, चोट पहुंचाने, सार्वजनिक इबादत की जगह को नुक़सान पहुंचाने, धर्म के आधार पर दो गुटों में शत्रुता बढ़ाने, बीजेपी, विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल और आरएसएस से जुड़े कई लोगों के ख़िलाफ़ कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप लगाए गए थे। FIR लाखों कार सेवकों और संघ परिवार के कार्यकर्ताओं समेत आडवाणी, जोशी, तत्कालीन शिवसेना नेता बाल ठाकरे, उमा भारती आदि के खिलाफ थी। इस मामले में 49 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था। इसमें से 17 की मौत हो चुकी है।

मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती, विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा, महंत नृत्य गोपाल दास, डा. राम विलास वेदांती, चंपत राय, महंत धर्मदास, सतीश प्रधान, पवन कुमार पांडेय, लल्लू सिंह, प्रकाश शर्मा, विजय बहादुर सिंह, संतोष दूबे, गांधी यादव, रामजी गुप्ता, ब्रज भूषण शरण सिंह, कमलेश त्रिपाठी, रामचंद्र खत्री, जय भगवान गोयल, ओम प्रकाश पांडेय, अमर नाथ गोयल, जयभान सिंह पवैया, साक्षी महाराज, विनय कुमार राय, नवीन भाई शुक्ला, आरएन श्रीवास्तव, आचार्य धमेंद्र देव, सुधीर कुमार कक्कड़ और धर्मेंद्र सिंह गुर्जर आरोपी थे।

28 साल बाद सुनवाई

सीबीआई व अभियुक्तों के वकीलों ने करीब आठ सौ पन्ने की लिखित बहस दाखिल की है। इससे पहले सीबीआई ने 351 गवाह व करीब 600 से अधिक दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए हैं। सीबीआई के वकील ललित सिंह के मुताबिक कि यह उनके न्यायिक जीवन में किसी मुकदमे का सबसे लंबा विचारण है। वह इस मामले में वर्ष 2015 से सुनवाई कर रहे हैं।

कोर्ट ने अपने फैसले में क्या-क्या कहा
  • सीबीआई की विशेष अदालत के जज ने कहा कि बाबरी विध्वंस की घटना कोई पूर्व नियोजित नहीं थी। मस्जिद को ढाए जाने की घटना आकस्मिक थी।
  • कोर्ट ने अखबारों को साक्ष्य नहीं माना। कहा- आरोपियों के खिलाफ कोई पुख्ता सुबूत नहीं, बल्कि आरोपियों ने उन्मादी भीड़ को रोकने की कोशिश की थी।
  • कोर्ट ने कहा- हम सिर्फ तस्वीरों के आधार पर ही किसी को दोषी नहीं बना सकते। इस मामले में जिन्हें आरोपी बनाया गया, उन्होंने बाबरी के ढांचे को बचाने की कोशिश की।
  • कोर्ट ने कहा- 12 बजे विवादित ढांचा के पीछे से पथराव शुरू हुआ। अशोक सिंघल ढांचे को सुरक्षित रखना चाहते थे, क्योंकि ढांचे में मूर्तियां थीं। कारसेवकों के दोनों हाथ व्यस्त रखने के लिए जल और फूल लाने को कहा गया था।
  • विशेष सीबीआई न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार यादव ने कहा- बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना में साजिश के प्रबल साक्ष्य नहीं हैं।
  • कोर्ट ने कहा- वीडियो कैसेट के सीन भी स्पष्ट नहीं, कैसेट्स को सील नहीं किया गया और फोटोज की निगेटिव पेश नहीं की गई।

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